वितस्ता विमर्श

अहिन्दी भाषा-भाषी क्षेत्र श्रीनगर, जम्मू व कश्मीर से प्रकाशित पूर्व-समीक्षित त्रैमासिक पत्रिका 

ISSN: NA

Call For Paper - Volume - 3 Issue - 2 (April-June 2026)

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Impact Factor: Under Process

Aim & Scope

उद्देश्य एवं लक्ष्य

एक समय ऐसा था जब कश्मीर से हिंदी भाषा की अनेक पत्र-पत्रिकाएँ प्रकाशित होती थीं जिनका प्रकाशन अब दुर्लभ है। वितस्ता विमर्श त्रैमासिक पत्रिका इस कमी को पूरा करने के लिए एक अल्प प्रयास है। कश्मीर की प्राचीन संस्कृति जो शारदा पीठ के नाम से पूरे विश्व में विख्यात थी, शारदा पीठ की उस संस्कृति को पुनः संस्थापित एवं प्रकाश में लाना हमारा देय है। हमारे इस प्रयत्न को सफल एवं सार्थक करें।

वितस्ता विमर्श पत्रिका के निम्न उद्देश हैं-

भाषा और संस्कृति का सेतु निर्माण-  कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा (कश्मीरी, उर्दू, डोगरी आदि) को हिंदी के माध्यम से पूरे भारत से जोड़ना। हिंदी को एक लिंक लैंग्वेज के रूप में उपयोग करके सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देना।

स्थानीय साहित्य को राष्ट्रीय मंच देना- कश्मीर के स्थानीय लेखकों, कवियों और शोधकर्ताओं की रचनाओं को हिंदी में प्रकाशित कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना। अनुवाद के माध्यम से कश्मीरी साहित्य को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाना।

शोध और अकादमिक विमर्श को बढ़ावा- पत्रिका में भाषा, साहित्य, इतिहास, संस्कृति और समाज से जुड़े शोध लेख प्रकाशित करना। विशेष रूप से कश्मीर की सामाजिक-राजनीतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर गहन अध्ययन को प्रोत्साहित करना।

राष्ट्रीय एकता और भावनात्मक जुड़ाव- कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों के बीच भावनात्मक और बौद्धिक संवाद को मजबूत करना। विविधता में एकता की भावना को साहित्य के माध्यम से प्रकट करना।

युवा लेखकों और शोधार्थियों को मंच देना- स्थानीय युवाओं को लेखन, आलोचना और शोध में भाग लेने के लिए प्रेरित करना। नए रचनाकारों को अवसर देकर साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाना।

वितस्ता विमर्श के लक्ष्य- उच्च गुणवत्ता की साहित्यिक सामग्रीको मंच देना तथा कविता, कहानी, निबंध, आलोचना, शोध लेख का प्रकाशन और पत्रिका को एक विश्वसनीय अकादमिक और साहित्यिक मंच बनाना।

द्विभाषिक/बहुभाषिक स्वरूप- हिंदी के साथ कश्मीरी, उर्दू या डोगरी रचनाओं का समावेश करना तथा अनुवाद और तुलनात्मक साहित्य को बढ़ावा देना।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान- ISSN प्राप्त करना तथा विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से जुड़ना पत्रिका को शोध के लिए मान्य और प्रतिष्ठित बनाना।

विशेषांक और थीम आधारित अंक- कश्मीर तथा भारतवर्ष की संस्कृति, लोकजीवन, इतिहास आदि पर विशेषांक और किसी एक विषय पर गहन और केंद्रित सामग्री देना।

एक ऐसी पत्रिका बनाना जो कश्मीर की आत्मा को हिंदी के माध्यम से पूरे भारत और विश्व तक पहुँचाए और साहित्य तथा शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहचान स्थापित करे।

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